चाय-काफी में दस प्रकार के जहर -------
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1. टेनिन नाम का जहर 18 % होता है, जो पेट में छाले तथा पैदा करता है।
2. थिन नामक जहर 3 % होता है, जिससे खुश्की चढ़ती है तथा यह फेफड़ों और सिर में भारीपन पैदा करता है।
3. कैफीन नामक जहर 2.75 % होता है, जो शरीर में एसिड बनाता है तथा किडनी को कमजोर करता है।
4. वॉलाटाइल नामक जहर आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
5. कार्बोनिक अम्ल से एसिडिटी होती है।
6. पैमिन से पाचनशक्ति कमजोर होती है।
7. एरोमोलीक आँतड़ियों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
8. साइनोजन अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयंकर बीमारियाँ पैदा करती है।
9. ऑक्सेलिक अम्ल शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है।
10. स्टिनॉयल रक्तविहार तथा नपुंसकता पैदा करता है।
इसलिए चाय अथवा कॉफी कभी नहीं पीनी चाहिए और अगर पीनी ही पड़े तो आयुर्वैदिक चाय पीनी चाहिए।
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1. टेनिन नाम का जहर 18 % होता है, जो पेट में छाले तथा पैदा करता है।
2. थिन नामक जहर 3 % होता है, जिससे खुश्की चढ़ती है तथा यह फेफड़ों और सिर में भारीपन पैदा करता है।
3. कैफीन नामक जहर 2.75 % होता है, जो शरीर में एसिड बनाता है तथा किडनी को कमजोर करता है।
4. वॉलाटाइल नामक जहर आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
5. कार्बोनिक अम्ल से एसिडिटी होती है।
6. पैमिन से पाचनशक्ति कमजोर होती है।
7. एरोमोलीक आँतड़ियों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
8. साइनोजन अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयंकर बीमारियाँ पैदा करती है।
9. ऑक्सेलिक अम्ल शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है।
10. स्टिनॉयल रक्तविहार तथा नपुंसकता पैदा करता है।
इसलिए चाय अथवा कॉफी कभी नहीं पीनी चाहिए और अगर पीनी ही पड़े तो आयुर्वैदिक चाय पीनी चाहिए।
'' When people hurt you Over and Over
think of them as Sand paper.
They Scratch & hurt you,
but in the end you are polished and they are finished. ''
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but in the end you are polished and they are finished. ''
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